Saturday, April 11, 2026

रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार (10 अप्रैल 2026) को गौतम बुद्ध नगर स्थित नोएडा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि छोटे मन का व्यक्ति हमेशा ईर्ष्या, कुंठा और हताशा के दौर से गुजरता है। उसके जीवन में सुख की प्राप्ति नहीं होती है। छोटेपन के व्यक्तित्व के आदमी के जीवन में आनंद की प्राप्ति नहीं होती। परम आनंद की बात तो बहुत दूर की है। उन्होंने कहा कि आप अपना मन जितना बड़ा करते चले जाओगे खुशियां और सुख की मात्रा बढ़ती चली जाएगी, आनंद की मात्रा बढ़ती चली जाएगी।

रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार (10 अप्रैल 2026) को गौतम बुद्ध नगर स्थित नोएडा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि छोटे मन का व्यक्ति हमेशा ईर्ष्या, कुंठा और हताशा के दौर से गुजरता है। उसके जीवन में सुख की प्राप्ति नहीं होती है। छोटेपन के व्यक्तित्व के आदमी के जीवन में आनंद की प्राप्ति नहीं होती। परम आनंद की बात तो बहुत दूर की है।  उन्होंने कहा कि आप अपना मन जितना बड़ा करते चले जाओगे खुशियां और सुख की मात्रा बढ़ती चली जाएगी, आनंद की मात्रा बढ़ती चली जाएगी। उन्होने कहा कि जितना मन बड़ा करोगे उतना ही परम आनंद पाओगे।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि परम आनंद की कोई मात्रा नहीं दर्शाई गई है। अगर जीवन में सुख प्राप्त करना चाहते हो, आनंद प्राप्त करना चाहते हो तो इस बात का बराबर ध्यान रखना की मन मे छोटापन मत आने दो। उन्होंने कहा कि अटल बिहारी वाजपेई जी कहते थे कि छोटे मन से कोई बड़ा नहीं हो सकता, और टूटे मन से कोई खड़ा नहीं हो सकता।

इंसान की जिंदगी बेहतर बनाने की जरूरत

रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि दुनिया के ज्यादातर बुद्धिमान लोग सिर्फ कमर्शियल फायदे के लिए विज्ञान की खोज और रिसर्च का उपयोग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी और विज्ञान का उपयोग इंसान की जिंदगी बेहतर बनाने की बजाय खुद के फायदे के लिए कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कंपनी के वैज्ञानिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के मदद से गंभीर बीमारियों  के उपचार के लिए काम कर रहे हैं, लेकिन उन कंपनी के मालिकों ने उन वैज्ञानिकों से सारे खोज संसाधन  उन लोगों को बेच दिया जो सुख साधन के सामग्री बनाते हैं। 

टेक्नोलॉजी पर राजनाथ सिंह की राय

राजनाथ सिंह ने कहा कि समस्या तब गंभीर होती है जब हम कमर्शियल को सामाजिक सरोकारों से ऊपर रख देते हैं। उन्होंने कहा कि इस बात की जरूरत है कि टेक्नोलॉजी सिर्फ मार्केट की जरूरत की मांग से नहीं बल्कि मानवता की जरूरत के हिसाब से आगे बढ़नी चाहिए।




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